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वेद संहिताएँ

वेद संहिताऐं
संकलनकर्त्ता – स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती

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वेद संहिताऐं
संकलनकर्त्ता – स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती
वेद ईश्वर की वाणी है। वेद ज्ञान के स्रोत हैं। वेदों में अनन्त ज्ञान भरा हुआ है। वे मानवमात्र के लिए प्रकाश – स्तम्भ हैं। वेद चार संहिताओं ऋक् – यजु – साम और अथर्व के रूप में प्राप्त होते है। इनमें ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, ज्योतिष, आयुर्वेद, मनोविज्ञान सम्बन्धित अनेकों रहस्य वर्णित है।
प्रस्तुत पुस्तकें चारों वेदों के मूल पाठों का संग्रह है। जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद चारों वेदों के मंत्रों का संग्रह किया गया है। जिनका विवरण निम्न प्रकार है –
1) ऋग्वेद – ऋग्वेद चारों वेदों का आधार स्तम्भ है। इसमें 11552 मंत्र है। यह ज्ञान – विज्ञान से भरा हआ है। प्रस्तुत पुस्तक में सस्वर मंत्रों का संकलन है। इसमें अध्यायों का विभाजन मंड़ल, सूक्त के रूप में किया गया है। मंत्रों के साथ – साथ उनके देवता, ऋषि, षडादि स्वर और छन्दों का भी संकलन है। परिशिष्ट में अकारादि क्रम में मन्त्रानुक्रमणि भी दी गई हुई है।
2) यजुर्वेद – प्रस्तुत संकलन में शुक्ल यजुर्वेद संहिता के 1975 मंत्रों का संग्रह है। यह कर्म कांड़ के लिए प्रसिद्ध है। इसमें सूत्ररूप में जीवन की विविध शिक्षाएँ दी हुई हैं। इसमें अध्याय और सूक्त के रूप में अध्यायों का विभाजन है। ऋग्वेद के समान ही प्रत्येक मंत्रों के छन्द, देवता, स्वर और ऋषि दिये गये हैं।
3) सामवेद – प्रस्तुत संकलन में सामवेद के सम्पूर्ण 1875 मूल मंत्रों का संग्रह किया गया है। इसका सम्बन्ध प्रभु की भक्ति और उपासना से है। इन मंत्रों का संगीत शास्त्र की दृष्टि से गान होता है। इस संकलन में भी उपरोक्त वेदों के समान ही ऋषि, देवता, छन्द, स्वर दिये हुये हैं।
4) अथर्ववेद – प्रस्तुत संकलन में अथर्ववेद संहिता के सम्पूर्ण 5978 मंत्रों का संकलन है। अथर्ववेद को ब्रह्मवेद, क्षत्रवेद, भैषज्यवेद आदि भी कहा जाता है। ज्ञान – विज्ञान की दृष्टि से अथर्ववेद रत्नाकार है। इसका विभाजन काण्ड, सूक्त और मंत्रों के रूप में है। इसमें भी मंत्रों के देवता, ऋषि, छन्द दिये गये हैं।

प्रस्तुत वेद संहिताऐं वेदार्थियों तथा शोधार्थियों के लिए अत्यन्त लाभप्रद सिद्ध होगा।