शतपथ के पथिक (2 खंडों में)

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पुस्तक का नाम – शतपथ के पथिक(दो भागो में )
 
सम्पादक – डा.विनोदचंद विद्यालंकार
 
आर्य समाज में स्वामी दयानंद जी के अनेको सिपाही हुए है जिन्होंने वैदिक धर्म और आर्ष ग्रंथो के उत्थान में जीवन भर कार्य किया तथा कई क्रांतिकारी कार्य किये जैसे – स्वामी दर्शनानंद जी ,स्वामी स्वत्रंततानन्द जी , पंडित लेखराम जी , पंडित चमूपति जी ,नारायण स्वामी जी ,युधिष्ठिर् मीमांसक जी , भगवत्त दत्त जी , उदयवीर शास्त्री जी ,ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी ,बुद्धदेव वेदालंकार जी ,बुद्धदेव मीरपुरी जी ,अमर स्वामी जी , रामचन्द्र देहलवी जी ,गंगाप्रसाद उपाध्याय जी , मनीषी गुरुदत्त विद्यार्थी जी आदि प्रमुख है |
इन्ही अनमोल कडियों में से के कड़ी बुद्धदेव विद्यालंकार जी अर्थात स्वामी समर्पणानन्द जी की है | इन्होने शतपथ ब्राह्मण का भाष्य किया था जिसमें इनके द्वारा की गयी ऊहापोह बड़ी ही विलक्षण और ग्रन्थ के हिंसा अश्लीलता परख लगने वाले आक्षेप रूपी कलंक का निवारण है|

शतपथ ब्राह्मण ही नही विभिन्न जटिल विषयों , शंकाओ को सरल सुगम रीति और प्रमाणों से सुलझाने और समाधान करने में निपुण थे | स्वामी जी ने अनेको विषयों पर लेख और गीता , वेदों के मन्त्रो का भाष्य भी किया | इनका गीताभाष्य इस तरह का है जिसकी व्याख्या त्रैतसिद्धांत को बलवती करती है | प्रस्तुत पुस्तक में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा लिखे गये स्वामी जी के जीवन चरित्र , वार्ता ,शास्त्रार्थ , कार्यो का संकलन है | स्वामी जी द्वारा लिखे गये विभिन्न विषयों पर निबन्धों ,वेद व्याख्यानों का संकलन है जो कि अत्यंत ज्ञान वर्धक और कई ग्रंथो को समझने की कुंजी का कार्य करते है | यदि आप विद्या के समुन्द्र में गोते लगाना चाहते है ,यदि आप ज्ञान की सरिता और भक्ति रस की वर्षा में स्नान करना चाहते है ,यदि आप वेद और वैदिक वांग्मय को आत्मसात करना चाहते है ,तो यह ग्रन्थ अवश्य पढ़े | स्वामी जी के संदेश सटीक व स्पष्ट है जो कि कठिन से कठिन परिस्थियों में भी सत्य का मार्ग प्रशस्त करते है | विद्यार्थियों ,आचार्यो , प्रवचनकर्ताओ , जिज्ञासुओ और स्वाध्यायशील पाठको के लिए पुस्तक अत्यंत उपयोगी है |