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सत्यार्थप्रकाश (मोटे अक्षरों में)

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Product Description

पुस्तक का नामः सत्यार्थप्रकाश (स्थूलाक्षरी संस्करण)

 

ज्ञान प्राप्ति की कोई आयु नहीं होती। व्यक्ति की आयु चाहे कुछ भी हो ज्ञान प्राप्ति के हेतू सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। स्वामी दयानन्द जी का कालजयी ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश यूं तो कई संस्करणों में छपता है किन्तु जिन वृद्ध-जनों की दृष्टि क्षीण हो चली है उनका ध्यान रखते हुए मोटे अक्षरों में सत्यार्थप्रकाश को छापा गया है। इस ग्रन्थ को छापने के पीछे यही मन्तव्य है कि सत्यार्थप्रकाश व्यक्ति केवल अपनी युवावस्था तक ही न पढ़े अपितु जीवन के अन्तिम क्षणों तक उसे पढ़कर स्वयं के वैदिक ज्ञान वृद्धि और संस्कार स्वरूप उस ज्ञान को अगले जन्म तक ले जाने हेतू उसे जीवन पर्यन्त पढ़ता रहे।
एक उद्देश्य यह भी है कि कई बार वैदिक विचारों से प्रभावित होकर कोई क्षीण दृष्टि वाले वृद्ध-जन यदि इस ग्रन्थ को पढ़ने की इच्छा करें तो उनके लिए इसे पढ़ पाना सरल हो सके। मोटे छापे में होने के कारण यह ग्रन्थ आकार में बड़ा हो गया है किन्तु अपने मूल उद्देश्यों को अवश्य पूर्ण करता है।