View Cart “रचनानुवाद कौमुदी” has been added to your cart.

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार

पुस्तक का नाम – प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार

लेखक – स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती

इस ग्रन्थ में उस अमूल्य सामग्री का संकलन है ,जो समय समय पर हमारे विद्वानों ने अपने साहित्य में प्रस्तुत की है |

सर विलियम जोम्स के भारत में आगमन के बाद पश्चमी विद्वानों का प्राचीन भारतीय वांग्मय से परिचय हुआ |

उन्होंने हमारे ग्रंथो के यूरोपीय भाषाओ में अध्ययन किये और हमारी संस्कृति का उदारता से भी अध्ययन किया |

बीसवी सदी के प्रारम्भिक दशको से ही भारतीय विद्वानों का ध्यान अपने देश की परम्परा की और गया |
इस ग्रन्थ में उस सामग्री का प्रचुरता से संकलन है | इस ग्रन्थ में तेरह अध्याय है प्रथम अध्याय में अग्नि के आविष्कारक अथर्वण और उसकी परम्पराओं का उलेख है | दुसरे में यज्ञ में प्रयुक्त यज्ञशालाओ के उपकरणों का उलेख है |

यह उपकरण अपने में अनोखे है आविष्कार है जिन्होंने यांत्रिकी की आधारशिला रखी | तीसरा और चौथा अध्याय वैदिक काल गणना ,विविध सम्वत्सरो और नक्षत्रो से सम्बन्ध रखता है | पांचवे छठे और सांतवे अध्याय चिकित्सा और शल्यकर्म से सम्बन्ध रखते है |
आठवे अध्याय में कणाद ऋषि का कारण कार्य सम्बन्ध और परमाणुवाद है | शेष नवे से तेरहवे अध्याय की समाग्री अंक गणित ,बीज गणित , रेखागणित और ज्योतिष से सम्बन्धित है जिसके प्रचलन का अधिकतम गौरव भारत को प्राप्त है |
इस पुस्तक के अध्ययन से पाठको को प्राचीन भारतीय वैज्ञानिको और अविष्कारको के बारे में जानकारी मिलेगी |

Share this product

595.00 Rs.

Compare
SKU: book00232 Categories: , , Tag:

Product Description

पुस्तक का नाम – प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार

लेखक – स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती

इस ग्रन्थ में उस अमूल्य सामग्री का संकलन है ,जो समय समय पर हमारे विद्वानों ने अपने साहित्य में प्रस्तुत की है |

सर विलियम जोम्स के भारत में आगमन के बाद पश्चमी विद्वानों का प्राचीन भारतीय वांग्मय से परिचय हुआ |

उन्होंने हमारे ग्रंथो के यूरोपीय भाषाओ में अध्ययन किये और हमारी संस्कृति का उदारता से भी अध्ययन किया |

बीसवी सदी के प्रारम्भिक दशको से ही भारतीय विद्वानों का ध्यान अपने देश की परम्परा की और गया |
इस ग्रन्थ में उस सामग्री का प्रचुरता से संकलन है | इस ग्रन्थ में तेरह अध्याय है प्रथम अध्याय में अग्नि के आविष्कारक अथर्वण और उसकी परम्पराओं का उलेख है | दुसरे में यज्ञ में प्रयुक्त यज्ञशालाओ के उपकरणों का उलेख है |

यह उपकरण अपने में अनोखे है आविष्कार है जिन्होंने यांत्रिकी की आधारशिला रखी | तीसरा और चौथा अध्याय वैदिक काल गणना ,विविध सम्वत्सरो और नक्षत्रो से सम्बन्ध रखता है | पांचवे छठे और सांतवे अध्याय चिकित्सा और शल्यकर्म से सम्बन्ध रखते है |
आठवे अध्याय में कणाद ऋषि का कारण कार्य सम्बन्ध और परमाणुवाद है | शेष नवे से तेरहवे अध्याय की समाग्री अंक गणित ,बीज गणित , रेखागणित और ज्योतिष से सम्बन्धित है जिसके प्रचलन का अधिकतम गौरव भारत को प्राप्त है |
इस पुस्तक के अध्ययन से पाठको को प्राचीन भारतीय वैज्ञानिको और अविष्कारको के बारे में जानकारी मिलेगी |