पारिजात संस्कृत हिन्दी शब्दार्थकोश

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पुस्तक का नाम – पारिजात संस्कृत –हिंदी शब्दार्थकोश: (वामन शिवराम आप्टे कृत संस्कृत-हिंदी कोश का संवर्धित संस्करण )
संग्रहकर्ता – पं.ईश्वरचन्द्र
प्रस्तुत कोश की शब्द संकलन पद्धति आधुनिक (अर्थात् आदि वर्ण के अनुक्रम से ) है| यद्यपि शब्दों के संकलन व अर्थनिर्देश के लिए पूर्व प्रकाशित कोश ग्रन्थों से साहयता ली गयी है तथापि सम्पादक ने स्वयं संस्कृत साहित्य के शताधिक ग्रन्थों का परिशीलन करके प्रस्तुत कोश की शब्दावली का महत्वपूर्ण भाग समाहृत किया है |
शब्द संकलन एवं व्युत्पत्ति की दृष्टि से सर्वाधिक सहायता शब्दकल्पद्रुम , वाचस्पत्यम् तथा हलायुधकोश से ली गयी है | अर्थ निर्देश के लिए आवश्यक होने पर अमरकोश (रामाश्रमी टीका युक्त ), शिवराम वामन आप्टे द्वारा सम्पादित संस्कृत –हिंदी कोश तथा विलियम मोनियर द्वारा लिखित संस्कृत-अंग्रेजी कोश तथा गणेश शास्त्री द्वारा सम्पादित संस्कृत –हिंदी कोश से सहायता ली है | शब्दसंकलन की दृष्टि से निम्नलिखित बिन्दुओं पर दृष्टिपात किया जाना आवश्यक है |
१ शब्दों को आदि अक्षर के अनुक्रम से रखा गया है |
२ प्रस्तुत कोश में लौकिक शब्दों को सम्मिलित किया गया है | इसके अतिरिक्त रामायण ,महाभारत ,स्मृति , पुराण, दर्शन , व्याकरण , गणित , ज्योतिष तथा आयुर्वेद आदि ज्ञान की विविध विद्याओं से प्रचुर सामग्री समाहृत है |
३ अत्यंत साधारण अन्तर के साथ एकाधिक रूपों में प्रचलित शब्दों को ,यदि उनके वर्णानुक्रम की स्थिति पास पास पड़ती है ,तो उन्हें साथ साथ रख दिया है |
४ संकलित शब्दों को व्याकरण की दृष्टि से वर्गों में विभक्त किया गया है | यथा – संज्ञा ,विशेषण ,धातु ,क्रियाविशेषण ,अव्यय तथा नामधातु |
५ कोश में शब्दों को प्रातिपदिक रूप ही दर्शाया गया है | संज्ञा शब्दों के साथ लिंग का निर्देश किया गया है | कुछ शब्द एकाधिक लिंगों में प्रयुक्त होते हैं तथा कुछ शब्दों के विषय में लिंगभेद होने पर अर्थभेद देखा जाता है – दोनों स्थितियों में एतादृश शब्द पृथक् लिंगनिर्देश के साथ उपात्त हैं | विशेषण शब्दों के साथ वि. इस प्रकार निर्देश किया गया है |
६ शब्दों के विविध अर्थों को महत्व के क्रम में अंग्रेजी अंक (1.2.3.4) देकर दर्शाया गया है | अर्थ को स्पष्ट करने के लिए एकाधिक पर्यायों को अर्थ विराम के द्वारा दिखाया गया है | जहाँ व्युत्पत्ति ,स्वरूप और लिंग के आधार पर विभिन्न अर्थों का वर्गीकरण एवं निर्देश अपेक्षित है , वहाँ पूर्ण विराम के पश्चात् पृथक् व्युत्पत्ति दर्शाई गई है |
७ समस्त पद के मुख्य शब्द (अर्थात् पूर्वपद ) के अंतर्गत (-) चिन्ह के द्वारा दर्शाया गया है | दो से अधिक पदों वाले समस्तपद को दर्शाने के लिए तृतीय पद से पूर्व (ं) चिन्ह दिया गया है तथा तीन से अधिक पदों से पूर्व (ंं) चिन्ह दिया गया है |
८ गुरुकोष्ठक में शब्दों की व्युत्पत्ति दर्शाई गई है |
९ मतुप् , वतुप् , मयट् व ट्यु आदि प्रत्ययों के निष्पन्न शब्दों को स्वतंत्र शब्दों के रूप में रखा गया है |
१० धातुओं का अनुबन्ध रहित रूप लिया गया है | धातुओं के साथ गणपद आदि का भी निर्देश किया गया है | प्रत्येक धातु को लट्लकार प्रथम पुरुष का एकवचन दिया गया है |
इस प्रकार प्रस्तुत कोश में न्यूनतम स्थान में उपयोगी एवं अधिकतम समाग्री देने का प्रयास किया गया है | तथा प्रत्येक शब्दों के अधिकाधिक सन्दर्भ देने का प्रयास किया गया है |
संस्कृत अध्येताओं के लिए यह कोश अतिशय उपयोगी सिद्ध होगा |
कुल पृष्ठ – लगभग १०३०
अंकित मूल्य –450रु.