गुलबदन बेगम का हुमायूँनामा

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पुस्तक का नाम – गुलबदन बेगम का हुमायूँनामा
अनुवादक का नाम – दामोदर लाल गर्ग
 
गुलबदन बेगम का “हुमायूँनामा” मूगल इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें बादशाह बाबर और उसके पुत्र हुमायुँ के समय का एकमात्र वह विवरण है जिसे अन्य इतिहासकार छू भी नहीं सके।
 
गुलबदन बेगम, बादशाह बाबर की लड़की और मिर्जा हिदाल की सगी बहिन तथा बादशाह अकबर की बुआ थी। इसका जन्म सन् 1520-21 के मध्य काबुल हुआ था।
 
इनके द्वारा लिखे इस पुस्तक की प्रामाणिकता के निम्न कारण हो सकते हैं –
 
1) यह बादशाही हरम की एक प्रतिष्ठित सदस्या थी। हरमों की ऐसी कोई कार्यवाही नहीं जो इसकी पैनी निगाहों से अछूती रही हो।
2) यह हुमायुँ की बडी़ बहिन और अकबर की बुआ होने के कारण इस पर किसी भी प्रकार की पाबन्दियां नहीं थीं, द्वितीय इसे शाही दस्तावेज देखने से भी कोई रोक नहीं सकता था।
3) यद्यपि इसे बादशाह हुमायु के निष्पादन के बाद इसे बादशाह के साथ रहने का कोई अवसर नहीं मिला किन्तु बाद में भाई कामरान के पास रही। फिर भी इसे पारिवारिक गतिविधियों और भाईयों से दीर्घकालीन संघर्षों को नजदीकी से देखने का अवसर प्राप्त हुआ था।
 
इस प्रकार हुमायु के इतिहास पर शोध करने वालों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है। इस संस्करण में शाही हरम की स्त्रियों के मनोरंजन, बड़प्पन, प्रतिशोध और परस्पर स्नेह के बारे में जहाँ लिखा वहीं तैमुरी वंश के शाही मजलिसों पर भी अच्छा प्रकाश डाला है।
 
इस संस्करम के अन्त में परिशिष्ट में बाबर के वंश वृक्ष का भी परिचय दिया है।
आशा है कि इतिहास प्रेमियों को यह संस्करण अतीव रुचिकर लगेगा और शोधार्थियों के लिए यह विशेष सहायक होगा।