चाँद फाँसी अंक

पुस्तक का नाम – चाँद फाँसी अंक
लेखक का नाम – चतुरसेन शास्त्री

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पुस्तक का नाम – चाँद फाँसी अंक
लेखक का नाम – चतुरसेन शास्त्री

“चाँद फाँसी अंक” 19 वीं सदी के अन्त और 20वीं शताब्दी के आरम्भ के उन बलिदानियों के बलिदान की गाथा है जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पण किया है। चाँद का प्रकाशन 1992 में इलाहाबाद में हुआ था। इसके प्रकाशक रामरिख सहगल थे। इसका सम्पादन आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने रामचरित उपाध्याय, जर्नादन झा ‘द्विज’, विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक, जी.पी. श्री वास्तव, पांडेय बेचन शर्मा उग्र, पं. पद्म सिंह शर्मा, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर,’ जयदेव विद्यालंकार, प्रफुल्लचंद ओझा के अथक सहयोग द्वारा किया।

इस अंक के माध्यम से 1857 के संग्राम के अदृश्य अत्याचारों को उजागर किया गया है। ख्वाजा हसन निजामी का लिखा हुआ ‘सन् 1957 में दिल्ली के लाल दिन’ है, जिसमें दिल्ली के पतन, बहादुर शाह जफर की गिरफ्तारी और उनकें तीन बेटों के कत्ल का प्रमाणिक विवरण है।

चाँद का फाँसी अंक, अपने प्रकाशन के तुरन्त बाद एक रोमांचकारी प्रसंग बन गया। इस अंक के लेखकों नें अंग्रेजों के अमानुषिक व्यवहार को न केवल जनता के समक्ष रखा है अपितु उसका प्रतिरोध करने की प्रेरणा भी दी है। इस अंक में क्रान्ति की एक धधकती ज्वाला फूंकने की अदम्य शक्ति थी, जिसे देखकर ब्रिटिश शासन स्वयं भयभीत हो उठा और उसने इसके प्रकाशन पर तुरन्त रोक लगा दी।

प्रस्तुत पुस्तक चाँद फाँसी अंक विप्लव यज्ञ की आहुतियाँ शीर्षक खण्ड़ में छपी थी।
इसमें बलिदानियों की जीवनियाँ हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए, हँसते, हँसते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

इस ऐतिहासिक वीर गाथा को अवश्य ही अध्ययन करना चाहिए।