बालचित्र कथाएँ – ( कॉमिक्स ) 12

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बालचित्र कथाएँ –

बालकों में धार्मिक और सामाजिक जागरूकता लाने के लिए एवं उनके चरित्र निर्माण के लिए विभिन्न चित्र कथाओं का संकलन किया गया है। इन चित्र कथाओं में महापुरूषों के जीवन चरित्र एवं उनकें कार्यों का अति मनोहर चित्रांकन किया गया है। ये चित्र कथाएँ निम्न है –

  • आर्य समाज के संस्थापक, महान समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती – इस पुस्तक में चित्रों के माध्यम से महर्षि दयानन्द के समाज सुधार कार्यों का वर्णन किया गया है।
  • प्यारा ऋषि – इस पुस्तक में स्वामी दयानन्द के विलक्षण व्यक्तित्व का वर्णन किया गया है।
  • महर्षि दयानन्द और उनकें अनुयायी – इस चित्र कथा में स्वामी दयानन्द की संक्षिप्त जीवनी और पं. गुरुदत्त विद्यार्थी, पं. लेखराम और स्वामी श्रद्धानन्द जी इन आर्यवीरों का जीवन चित्रण किया है, जिससे की बालकों को इनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त हो सकें।
  • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस – “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का अमर नारा देने वाले महान क्रान्तिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के ध्वज तले भारतीय जन-साधारण को देश के लिए बलिदान देने हेतु न केवल प्रेरित किया वरन् ब्रिटिश सेना का डटकर मुकाबला भी किया। यह चित्रकथा विशेषतौर पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए तैयार की गई है, ताकि वें नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से प्रेरणा लेकर देश व धर्म के लिए कुछ ऐसा करें, जिससे पूरा राष्ट्र गौरवान्वित हो उठे।

(5) अमर शहीद सरदार भगतसिहं – 23 वर्ष का कोई भी युवा आज किसी भी अभिनेता के एक-एक संवाद सुना सकता है, लेकिन भारतीय सभ्यता-संस्कृति और इतिहास के विषय में प्रश्न पूछ लिए जाएँ तो उत्तर उसके पास नहीं, क्योंकि आज वह आजादी की खुली हवा में साँस ले रहा है। लेकिन इसी छोटी-सी आयु में सरदार अर्जुन सिंह महर्षि दयानन्द सरस्वती के उपदेशों से प्रभावित होकर आर्य समाजी बन गए थे। स्वामी दयानन्द का अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश इस परिवार का धर्म ग्रन्थ बन गया था, जिसे पढ़कर सरदार भगतसिंह ने जाना कि कोई कितना ही करे, परन्तु स्वदेशी राज्य ही सर्वोपरि उत्तम होता है।

यह प्रेरणादायक चित्रकथा बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए विशेषतौर पर तैयार की गयी है, ताकि इसे पढ़कर वे भी सरदार भगत सिंह की तरह देशभक्त बन सकें और वैदिक धर्म, आर्य सभ्यता और पावन भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्ण रुपेण समर्पित हो सकें।

(6) महान क्रांतिकारी अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल – ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ इस अमर गीत को गाते हुए न जाने कितने युवा देश की आजादी के लिए हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। इस गीत के लेखक अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल का बचपन बुरी आदतों से भरा था, लेकिन जैसे ही वह आर्यसमाज के सम्पर्क में आए और उन्होनें स्वामी दयानन्द का अमर ग्रन्थ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पढा तो उन्होने सारी बुरी आदतों को छोड़ दिया और उनका जीवन कुंदन बन गया। फिर उन्होनें देश को स्वतंत्र कराने का संकल्प लिया और विभिन्न प्रांतो में देशभक्तों को ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ के ध्वज तले एकत्र करके क्रांति का बिगुल बजाया। अंग्रेजी सरकार भारतीयों को लूटती थी और उन्होनें काकोरी स्टेशन के पास सरकारी खजाने को लूट कर ब्रिटिश सरकार को खुले आम चुनौती दी। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए अंततः फाँसी के फंदे को गले लगाया।

रामप्रसाद बिस्मिल के जीवन पर आधारित यह चित्रकथा विशेषतौर पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए तैयार की गयी है, ताकि वे भी उनके जैसे देशभक्त, वीर, निडर और साहसी बन सकें।

 

(7) अमर हुतात्मा महान शिक्षाविद्, क्रांतिकारी स्वामी श्रद्धानन्द – स्वामी जी पर अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने के कारण उन पर पाश्चात्य सभ्यता का रंग चढ़ गया और वे अनीश्वरवादी तथा भोगपरस्त व्यक्ति बन गये थे। परन्तु एक बार अपने पिता के कहने पर वे आर्यसमाज के संस्थापक ‘महर्षि दयानन्द’ का प्रवचन सुनने चले गये तभी से उनके जीवन में बदलाव आने लगा और आगे चलकर वे एक सच्चे आर्यसमाजी बन गये। उन्होनें महर्षि दयानन्द की इच्छा पूर्ण करने के लिए हरिद्वार में ‘गुरूकुल कांगडी’ नामक शिक्षण संस्थान की स्थापना की जो आज विश्व का प्रख्यात विश्वविद्यालय है। स्त्री शिक्षा के प्रबल हिमायती स्वामी श्रद्धानन्द को अछूतों के उद्धार करने के कारण महान पवित्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए जामा मस्जिद की मीनार से लोगों को स्वराज एवं स्वधर्म के लिए प्रेरित करने का साहस किया था। स्वामी जी की निःस्वार्थ सेवा भावना से दिल्ली का प्रबुद्ध मुस्लिम समुदाय बेहद प्रभावित था।

स्वामी श्रद्धानन्द की यह प्रेरणादायक चित्रकथा विशेषतौर पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए तैयार की गयी है, ताकि वे भी उनकें जैसे स्वदेशभक्त, स्वाभिमानी, वैदिक धर्म और भारतीय संस्कारों के रंग में रंग जाएँ।

 

(8) पंजाब केसरी लाला लाजपतराय – पंजाब केसरी लाला लाजपतराय एक महान समाज सुधारक, शिक्षा शास्त्री और क्रान्तिकारी थे। गर्म दल की लाल-बाल-पाल की त्रिमुर्ति में से एक लाला लाजपतराय ने महर्षि दयानन्द सरस्वती से प्रेरणा पाकर अपना सम्पूर्ण जीवन देश की स्वतंत्रता, स्वदेशी शिक्षा और जन कल्याण में लगा दिया और अंततः ब्रिटिश सैनिकों की लाठियों के प्रहार के कारण शहीद हो गए। सरदार भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद ने लालाजी की मौत का बदला लेकर ईट का जवाब पत्थर से दिया। लालाजी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है – यदि मैं आर्य समाज में दाखिल न होता, तो यह सच है कि मै आज जो कुछ भी हूँ, वह न होता।

लाला लाजपतराय की यह प्रेरणादायक चित्रकथा विशेषतौर पर बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए तैयार की गई है, ताकि इसे पढ़कर वे भी वीर, देशभक्त, निडर और साहसी बन सकें।

 

(9) अमर क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद – पंद्रह वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ने वाले इस वीर ने देश सेवा करते हुए मात्र पच्चीस वर्ष की उम्र में बडे़ स्वाभिमान से शहादत प्राप्त की। इनकी निडरता पर इन्हें आजाद के नाम से जाना जाता है। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल आर्यसमाजी थे, इसलिए इनके साथ रहने से चंद्रशेखर आजाद पर भी इसका प्रभाव पडा था। ब्रह्मचर्य का पूर्णरुपेण पालन करने वाले चन्द्रशेखर आजाद क्रान्ति के पथ पर चलते हुए देश को स्वतंत्र कराना चाहते थे, वे कहते थे – लातों के भूत बातों से नहीं मानते है।

जीवन में मात्र 25 वसंत देखने वाले चन्द्रशेखर आजाद, आजाद ही रहे और अंततः स्वराज के लिए संघर्ष करते हुए अपनी ही गोली से शहीद हो गए।

आजाद की यह प्रेरणादायक चित्रकथा बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए विशेषतौर से तैयार की गई है, ताकि इसे पढ़कर वे भी आजाद की तरह देशभक्त बनकर राष्ट्र धर्म, वैदिकधर्म एवं पावन भारतीय सभ्यता व संस्कृति के प्रति पूर्ण रुपेण समर्पित हो सकें।

(10) शेख चिल्ली और लालबुझक्कड़ के कारनामें – इस हास्यकथा के माध्यम से बच्चों को कर्मठ बनने की शिक्षा दी गई है। उन्हें कल्पनाओं में न जी कर यथार्थ में कुछ करने की प्रेरणा मिले इसी उद्देश्य से इस हास्य कथा का संकलन किया है।

(11) भगवान को क्यों मानें? – इस चित्रकथा में ईश्वर के अस्तित्व को रोचक माध्यम से सिद्ध किया है। बच्चों में नास्तिकता प्रवेश न करें इस उद्देश्य से यह पुस्तक लिखी गई है।

आशा है कि बालकों और उनकें माता-पिताओं को ये बालचित्र कथाएँ अत्यन्त लाभदायक सिद्ध होगी।